UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : GS प्रश्न पत्र 3 की रणनीति

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : GS प्रश्न पत्र 3 की रणनीति- विदित हो की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा 18 जून को देश भर में आयोजित की गई, इस परीक्षा में सफल रहने वाला छात्र परीक्षा के दूसरे चरण ‘मुख्य परीक्षा’ के लिए अपनी जगह बनाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को सामान्यतः अक्तूबर से नवंबर माह के दौरान मुख्य परीक्षा देने के लिये आमंत्रित किया जाएगा।

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 : फ्री पैकेज
यह पैकेज IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 को ध्यान में रखकर संकलित किया गया है। यह पैकेज अभ्यर्थियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है तथा उनको प्रारंभिक परीक्षा के लिए रणनीत बनाने में सहायता प्रदान करता है तथा साथ ही साथ उनके आत्मविश्वास में वृद्धि भी करता है। इस पैकेज में 10 टेस्टों का संकलन किया गया है और प्रत्येक टेस्ट में 100 प्रश्न हैंl

यह ध्यान रखने वाली बात है की जहाँ प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (MCQ) होती है, वहीं मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (Descriptive) होती है और उसमें अलग-अलग शब्द सीमा वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। यही कारण है कि मुख्य परीक्षा में सफल होने के लिये अच्छी लेखन शैली को भी एक महत्त्वपूर्ण योग्यता माना जाता है। प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति जहाँ क्वालिफाइंग होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम मेधा सूची में जोड़ा जाता है। अत: परीक्षा का यह चरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं काफी हद तक निर्णायक होता है।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा  पैटर्न   

ध्यातव्य है कि सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में विषयों का बँटवारा अनिवार्य एवं वैकल्पिक विषय के रूप में किया गया है।अनिवार्य विषयों में निबंध, सामान्य अध्ययन के चार प्रश्नपत्र, अंग्रेजी भाषा (क्वालिफाइंग) एवं हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा (क्वालिफाइंग) तथा वैकल्पिक विषय के अंतर्गत अभ्यर्थी द्वारा चयनित कोई एक वैकल्पिक विषय शामिल है।

2012 तक यह परीक्षा कुल 2000 अंकों की होती थी परन्तु 2013 से यह संरचना व्यापक रूप से बदल गई है। अब मुख्य परीक्षा कुल 1750 अंकों की है जिसमें 1000 अंक सामान्य अध्ययन के लिये (250-250 अंकों के 4 प्रश्नपत्र), 500 अंक एक वैकल्पिक विषय के लिये (250-250 अंकों के 2 प्रश्नपत्र) तथा 250 अंक निबंध के लिये निर्धारित हैं।

नवीन संशोधन के पश्चात् सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के विभिन्न प्रश्नपत्र तथा उनके भारांक इस प्रकार हैं-

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा पैटर्न 2018      

क्रम संख्या प्रश्न पत्र प्रश्न पत्र का नाम   अंक   प्रकृति

परीक्षा समयावधि

1 प्रश्न पत्र A अनिवार्य हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा 300 क्वालीफाइंग प्रकृति  3 घंटे
2 प्रश्न पत्र B अंग्रेजी भाषा 300 3 घंटे
3 प्रश्न पत्र -1 निबंध 250 अंतिम मेधा सूचि रैंकिंग प्रकृति  3 घंटे
4 प्रश्न पत्र -2 सामान्य अध्ययन-1

(भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज) 

250 3 घंटे
5 प्रश्न पत्र -3 सामान्य अध्ययन-2

(शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

250 3 घंटे
6 प्रश्न पत्र -4 सामान्य अध्ययन-3

(प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन)

250 3 घंटे
7 प्रश्न पत्र -5 सामान्य अध्ययन-4

(नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति)

250 3 घंटे
8 प्रश्न पत्र -6 वैकल्पिक विषय-1 250 3 घंटे
9 प्रश्न पत्र -7 वैकल्पिक विषय-2 250 3 घंटे
  सम्पूर्ण 1750
नोट: मुख्य परीक्षा के मेरिट का निर्धारण सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्न-पत्र (1000 अंक), वैकल्पिक विषय के दोनों प्रश्न-पत्र (500 अंक) एवं निबंध (250 अंक) के पत्र में प्राप्त अंको के आधार किया जाता है। अतः इसमें अनिवार्य विषय के प्रश्न-पत्र के (600 अंक) अंक नहीं जोड़े जाते।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा GS प्रश्न पत्र-3 का पाठ्यक्रम 

UPSC सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा के GS प्रश्न पत्र-3 में प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन को सम्मिलित किया है। परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार GS प्रश्न पत्र-3 को 20 अनुभाग में विभक्त किया गया है। जिनका विवरण निम्न है-

सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3
प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन

क्र.सं.

विषय

1. भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
2. समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
3. सरकारी बजट।
4. मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।
5. प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।
6. भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग- कार्यक्षेत्र एवं महत्त्व, स्थान, ऊपरी और नीचे की अपेक्षाएँ, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।
7. भारत में भूमि सुधार।
8. उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।
9. बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
10. निवेश मॉडल।
11. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।
12. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
13. सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
14. संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
15. आपदा और आपदा प्रबंधन।
16. विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।
17. आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।
18. संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।
19. सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।
20. विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

पाठ्यक्रम से स्पष्ट है कि इस प्रश्न पत्र के अन्तर्गत आर्थिक विकास से संबंधित मुद्दे, प्रौद्योगिकी एवं जैवविविधता, आर्थिक विकास, वातावरण, पर्यावरण एवं आपदा प्रबंध से संबंधी मुद्दे, सुरक्षा से संबंधित मुद्दे आते हैं। यह प्रश्नपत्र काफी जटिल एवं सामायिक विषयों पर आधारित होता है। अभ्यर्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वें दिन प्रतिदिन के सामयिक विषयों पर अपनी समझ बनाये।

हालाँकि यह आलेख मुख्यतः मुख्य परीक्षा पर केन्द्रित है। हाँ, प्रदत्त सूची बस सांकेतिक है, एक-एक विषय पर अभी ढेरों स्तरीय किताबें उपलब्ध हैं, आपको उस किताब को चुनना है जो आपको पढ़ने और समझने में अच्छी लग रही हो। आपको यह ध्यान में रखना है की आपको सिलेबस तैयार करना है न की किताबें। किताबो से वे ही चैप्टर पढ़े जो सिलेबस में पढ़नी हो।

एक बार सिलेबस को समाप्त करने के बाद आप किसी भी नई किताब को देखकर यह पता कर सकते हैं की उसमें आपके काम का और कुछ है या नही। वैसे NCERT की भूगोल वर्ग के तहत संसाधन और विकास, पर्यावरणीय एवं पारिस्थिकी से सम्बंधित पुस्तकों, अर्थव्यवस्था के तहत भारतीय आर्थिक विकास (सभी अध्यायों 1 से 10) और समष्टि अर्थशास्त्र, आर्थिक विकास समझौता  की  किताबों को आप आंख मूंदकर सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-1 का आधार बनाने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। यहाँ वह पुस्तकें उल्लेखित की जा रही है, जिसका अध्ययन अनिवार्य है-

1) पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकीदृष्टि प्रकाशन; NCERT और NIOS की पुस्तकें भी पढ़नी चाहियें।
2) सामान्य विज्ञान: NCERT की पुस्तकें (क्लास 9-12); सामान्य विज्ञान: लूसेंट विशेष; GS मैन्युअल : यूनिक प्रकाशन, इलाहाबाद; भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी (स्पेक्ट्रम); भारत में विज्ञानं एवं प्रोद्योगिकी: टाटा मैक्ग्राहिल की पुस्तकें भी पढ़नी चाहियें।
3) आर्थिक: NCERT की पुस्तकें [मुख्य रूप से भारतीय आर्थिक विकास (सभी अध्यायों 1 से 10) और समष्टि अर्थशास्त्र, आर्थिक विकास समझौता का अध्ययन]; भारतीय अर्थव्यवस्था विशेषांक : प्रतियोगिता दर्पण; आर्थिक सर्वेक्षण : भारत सरकार का अध्ययन आवश्यक है।
4) आतंरिक सुरक्षा: आंतरिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी गृह मंत्रालय की है, अतः आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों, योजनाओं, प्रणालियों आदि से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जिन्हें अभ्यर्थियों को देखते रहना चाहिये। इन एजेंसियों में हो रहे बदलावों व बदलते परिदृश्य में इनकी भूमिका के विषय में समसामयिक पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से स्वयं को अपडेट करते रहना चाहिये। विकास और उग्रवाद के प्रसार के मध्य संबंध, आंतरिक सुरक्षा में नॉन स्टेट एक्टर्स की भूमिका, साइबर सुरक्षा-राष्ट्रिय साइबर सुरक्षा नीति (2013), मनी लॉन्डरिंग, सीमावर्ती क्षेत्रों (विशेषकर पूर्वोत्तर) में सुरक्षा चुनौतियाँ तथा प्रबन्धन, आतंकवाद तथा संगठित अपराध के मध्य संबंध जैसे विषयों को अभ्यर्थियों द्वारा तैयार किया जाना चाहिए। www.idsa.in (Institute for Defense Study) साईट से महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत होते रहें।

 सामान्य अध्ययन तृतीय पत्र के लिये अन्य स्रोत

Rajya sabha tv – सामयिक मुद्दों पर चर्चा
Air news- सामयिक मुद्दों पर चर्चा
www.nasscom.org (सामाजिक – आर्थिक नीति के लिये उपयोगी)
www.sciencemag.org (विज्ञान मैगज़ीन)
www.ipcc.ch [Climate change-जलवायु परिवर्तन हेतु विशेष)]
www.Downtoearth.org.in (Down to Earth-सामान्य अध्ययन विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी खण्ड के लिये महत्वपूर्ण))
www.egyankosh.ac.in (IGNOU पुस्तकें)
www.moef.nic.in (वन एवं पर्यावरण संबंधी मुद्दों के लिये उपयोगी)
www.nasscom.org (सामाजिक-आर्थिक नीति के लिये उपयोगी)
www.amnesty.org (सामाजिक मुद्दों पर वार्षिक रिपोर्ट)
www.arc.gov.in [Arc Report (अर्थव्यवस्था संबंधी पॉलिसी एवं रिपोर्ट)]

 

समाचार पत्र:
http://www.thehindu.com (दी हिन्दू)
http://www.thehindubusinessline.com (व्यापार)
http://www.business-standard.com/ (बिजनेस स्टैंडर्ड)
http://economictimes.indiatimes.com (नवभारत टाइम्स)

 नोट : NCERT, NIOS, IGNOU की पुस्तकों के अतिरिक्त नोट्स, योजना तथा कुरुक्षेत्र का अध्ययन करना लाभदायक रहता है। विगत वर्षों के प्रश्नों को ज़रूर देखें, क्योंकि यहाँ प्रश्न ज्यों के त्यों दुहराए जाने की संभावना रहती है।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2017 : GS प्रश्न पत्र-3 की रणनीति

UPSC प्रश्न पत्र 4 अथार्त सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 के तहत अभ्यर्थियों को ‘प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन’ का अध्ययन करना है, जिसका विवरण निम्न है-

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में हुए बदलाव के पश्चात अब दैनिक जीवन/ रोजमर्रा जीवन से संबंधित विज्ञान और प्रौद्योगिकी खंड से प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्न निश्चित क्षेत्रों अथार्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ, देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में पूछे जाते है। अतः इन विषयों पर जागरूकता बढ़ानी चाहिए।

पिछले 2-3 वर्षों से सिविल सेवा परीक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी खंड से पूछे जाने वाले प्रश्न समसामयिक प्रकृति के रहे हैं। उनमें किसी विशेष ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। वे घटनाओं की सामान्य समझ और मुद्दों के संदर्भ में तथ्य व सूचनाओं की मांग करते हैं। विभिन्न तथ्यों व सूचनाओं के आधार पर विश्लेषण करना वांछनीय समझा जाता है। उदाहरण के लिये, यदि अभ्यर्थी से पूछा जाए कि अंतरिक्ष विज्ञान की उपलब्धियों एवं सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान की विवेचना कीजिए। सर्वर की क्लाउड होस्टिंग संस्थागत मशीन होस्टिंग से कैसे भिन्न है? लाभ और सुरक्षा निहितार्थों पर चर्चा कीजिए? ठोस कचरा अपशिष्ट निपटान की विधियाँ सुझाते हुए भारतीय सन्दर्भ में उन विधियों की व्यव्हार्ता का मूल्यांकन कीजिए, तो ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने के लिये तथ्य व सूचना का होना आवश्यक है। अक्सर सिविल सेवा परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी समाचार-पत्रों में ऐसी नई-नई तकनीकों, उनकी कार्यप्रणाली, उनसे सफलता व असफलता मिलने की संभावनाओं के बारे में चर्चाएँ प्रकाशित की जाती हैं। इन स्रोतों से महत्त्वपूर्ण मुद्दों को तैयार किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के रोगों और उनसे जुड़े अनुसंधानों के बारे में भी सूचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। उदाहरण के लिये, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus), रोटा वायरस (Rota virus), रेट्ट सिंड्रोम (Rett syndrome), सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) आदि। इनसे संबंधित प्रश्न मुख्य परीक्षा में पूछे जाते हैं।

अभ्यर्थियों को चाहिये कि वे मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुरूप चर्चा में रहे मुद्दों पर सूचनाओं का संग्रह करें और उन पर मॉडल उत्तर लिखने का प्रयास करें।

अर्थव्यवस्था

इस खंड का संबंध प्रारंभिक परीक्षा से लेकर साक्षात्कार परीक्षा तक है और परीक्षा में यह विशेष स्थान रखता है। इस खंड में हम सिर्फ मुख्य परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति, आधार व प्रकार इत्यादि की ही बात करेंगे। विगत तीन वर्षों की मुख्य परीक्षाओं में ‘आर्थिक विकास एवं अर्थव्यवस्था’ खंड से पूछे गए प्रश्नों की बात करें तो इस खंड से लगभग 100 अंकों से अधिक प्रश्न पूछे गए। अर्थव्यवस्था में पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि इनके उत्तर देने के लिये विषय की बुनियादी समझ के साथ-साथ विभिन्न आयामों के विश्लेषण की भी क्षमता होनी चाहिये, क्योंकि सारे प्रश्न सैद्धांतिक के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के व्यावहारिक पक्ष को भी समेटे होते हैं। इस विषय में एक और महत्त्वपूर्ण व लाभप्रद बात यह है कि अधिकांशतः प्रश्न कहीं न कहीं समसामयिक घटनाओं से संबंधित अवश्य रहते हैं। अतः देश-विदेश के आर्थिक जगत में घटित हो रही घटनाओं पर ध्यान रखकर ही इन विषयों की तैयारी करनी चाहिये।

एक अन्य सबसे महत्त्वपूर्ण बात है कि यदि सरकार द्वारा आर्थिक या वित्तीय जगत में किसी प्रकार के नीतिगत फैसले लिये जा रहे हैं, किसी नियम-कानून में परिवर्तन हो रहा है तो उसे अवश्य ही कहीं न कहीं प्रश्न से जोड़कर पूछा जा सकता है। यह प्रश्न इस बिंदु को भी प्रकाश में लाता है कि किस तरह से नए पैटर्न में किसी एक विषय पर प्रश्न न पूछकर विभिन्न विषयों को जोड़कर और व्यावहारिक पक्ष पर ज़ोर देते हुए प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, आधारभूत संरचना, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से संबंधित प्रश्नों को भी देख सकते हैं। परंतु ध्यान रहे कि कृषि से संबंधित सैद्धांतिक प्रश्न जैसे ‘फसल प्रारूपों, सिंचाई प्रणाली इत्यादि पर प्रश्न न पूछकर कृषि में समस्या, ग्रामीण साख इत्यादि से संबंधित प्रश्न पूछे जा रहे हैं। अतः हमें विषयों को पढ़ते वक्त इन सभी को ध्यान में रखकर ही तैयारी करनी चाहिये।

अब, अगर उपरोक्त सभी बातों को चंद बिंदुओं में समेटा जाए तो प्रश्नों की प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित निष्कर्ष सामने आते हैं-

1. विषय की बुनियादी समझ आवश्यक है।
2. प्रश्न महज सैद्धांतिक न होकर व्यावहारिक तथा बहुआयामी प्रकृति के पूछे जा रहे हैं।
3. अधिकांशतः प्रश्न समसामयिक विषयों से संबंधित पूछे जा रहे हैं।
4. विभिन्न आयामों को एक दूसरे से जोड़कर विश्लेषण करने की क्षमता को महत्त्व दिया जाना चाहिये।

आतंरिक सुरक्षा 

आंतरिक सुरक्षा हमारे देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। सम्भवतः इसीलिये सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया है। सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न आयामों की एक सामान्य समझ विकसित करें। अभ्यर्थियों को इस खंड की तैयारी विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति तथा प्रारूप को ध्यान में रखकर करनी चाहिये, जिसमें प्रश्नों का झुकाव समसामयिक मुद्दों की ओर अधिक है।

आंतरिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी गृह मंत्रालय की है, अतः आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों, योजनाओं, प्रणालियों आदि से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जिन्हें अभ्यर्थियों को देखते रहना चाहिये। इन एजेंसियों में हो रहे बदलावों व बदलते परिदृश्य में इनकी भूमिका के विषय में समसामयिक पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से स्वयं को अपडेट करते रहना चाहिये। अभ्यर्थी को आंतरिक सुरक्षा खंड की बेहतर समझ विकसित करने के लिये इसे कई उपविषयों में विभाजित करके पढ़ना चाहिये, जैसे-

• विकास और उग्रवाद के प्रसार के मध्य संबंध
• आंतरिक सुरक्षा में नॉन स्टेट एक्टर्स की भूमिका
• साइबर सुरक्षा-राष्ट्रिय साइबर सुरक्षा नीति (2013)
• मनी लॉन्डरिंग
• सीमावर्ती क्षेत्रों (विशेषकर पूर्वोत्तर) में सुरक्षा चुनौतियाँ तथा प्रबन्धन
• आतंकवाद तथा संगठित अपराध के मध्य संबंध
• भारत का परमाणु कार्यक्रम…इत्यादि

अभ्यर्थियों को चाहिये कि वे समसामयिक मुद्दों पर विभिन्न सूचनाओं का संग्रह कर, मुख्य परीक्षा के प्रश्नों के प्रारूप व प्रकृति को समझते हुए स्वयं प्रश्न तैयार करके उत्तर लिखने का प्रयत्न करें।

आशा है इस लेख से आपको महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई होगी और यह जानकारी आपके अध्ययन को सुगम बनाएगी साथ ही आपकी सफलता के लिए दिशा प्रदान करेगी।

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