UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : सफलता के लिए क्या हो रणनीति

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UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2017 : परीक्षा रणनीति

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : परीक्षा रणनीति : विदित हो की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहने वाला छात्र परीक्षा के दूसरे चरण ‘IAS Mains (मुख्य) परीक्षा’ के लिए अपनी जगह बनाएंगे। लोक सेवा आयोग (Union Service Public Commission) की मुख्य परीक्षा (UPSC Civil Services Main Exam) 28 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होगी। यूपीएससी ने हाल ही में प्री परीक्षा का रिजल्ट (UPSC Prelims Exam Result) जारी किया था। करीब 3 लाख उम्मीदवार यूपीएससी प्री परीक्षा में बैठे थे। यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा (UPSC Prelims Exam 2018) इस साल 3 जून को हुई थी। यूपीएससी मेन्स परीक्षा सितंबर में आयोजित होगी, परीक्षा को लेकर अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में उम्मीदवारों को मेन्स परीक्षा के लिए तैयारी तेज कर देनी चाहिए। यूपीएससी सिविल सर्विसेज की परीक्षा को क्रैक करने के लिए उम्मीदवार सालों साल महनत करते हैं, लेकिन फिर भी इसे क्रैक करना काफी मुश्किल होता है।

अभ्यर्थियों के लिए यह ध्यान रखने वाली बात है की जहाँ प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (MCQ) होती है, वहीं मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (Descriptive) होती है और उसमें अलग-अलग शब्द सीमा वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। यही कारण है कि मुख्य परीक्षा में सफल होने के लिये अच्छी लेखन शैली को भी एक महत्त्वपूर्ण योग्यता माना जाता है। प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति जहाँ क्वालिफाइंग होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम मेधा सूची में जोड़ा जाता है। अत: परीक्षा का यह चरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं काफी हद तक निर्णायक होता है।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : परीक्षा रणनीति

जाहिर है कि मुख्य परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा से अलग होती है। अतः इसके लिये रणनीति में परिवर्तन की दरकार होती है यह परीक्षा भिन्न और विशिष्ट रणनीति की मांग करती है। अगर आप हिंदी माध्यम से IAS बनने का सपना देख रहे हैं तो आपको सामान्य अध्ययन से जुड़ी सभी समस्याओं की समझ होनी चाहिये जो आपके समक्ष प्रकट होने वाली हैं। प्रायः यह देखा और महसूस किया गया है कि सामान्य अध्ययन (मुख्य परीक्षा) में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी अंग्रेज़ी माध्यम की तुलना में कुछ नुकसान की स्थिति में रहते हैं। इसका कारण परीक्षा प्रणाली की आंतरिक प्रकृति अथार्त पाठ्य-सामग्री की अनुपलब्धता, परीक्षक की हिंदी में सहजता का स्तर एवं प्रश्नपत्र में अनुवाद संबंधी त्रुटियों में काफी हद तक खोजा जा सकता है। समस्याओं का समाधान अभ्यर्थी काफी हद तक तो कर सकता है परन्तु कुछ चीजे जी उसकी सीमा से बाहर है उसे नियंत्रित नहीं कर सकता है। परीक्षक का हिंदी में सहजता का स्तर क्या है, इसे तो अभ्यर्थी नियंत्रित नहीं कर सकता; पर अन्य समस्याओं का हल निकाल सकता है।

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 : फ्री पैकेज
यह पैकेज IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 को ध्यान में रखकर संकलित किया गया है। यह पैकेज अभ्यर्थियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है तथा उनको प्रारंभिक परीक्षा के लिए रणनीत बनाने में सहायता प्रदान करता है तथा साथ ही साथ उनके आत्मविश्वास में वृद्धि भी करता है। इस पैकेज में 10 टेस्टों का संकलन किया गया है और प्रत्येक टेस्ट में 100 प्रश्न हैंl

भाषा सहज और व्यवहारिक रखें :  किसी भी विषय का अध्ययन करते समय यदि पारिभाषिक या तकनीकी शब्द बीच में आए, उसे हिंदी के साथ अंग्रेज़ी में भी पढने की आदत डालें और अपने नोट्स में लिखें। सामान्य अध्ययन के उत्तर लिखते हुए हिंदी भाषा की बोधगम्यता को बनाएं रखें और ऐसा करने के लिए हिंदी भाषा के कठिन शब्दों का प्रयोग करने से बचें। अगर लिखना अनिवार्य हो जाएं तो पहली बार उसका प्रयोग करते समय कोष्ठक में उसका अंग्रेज़ी रूप भी लिख दें, जैसे- ‘नाभिकीय संलयन’ (Nuclear Fusion), ‘युक्तियुक्त निर्बंधन’ (Reasonable Restrictions) इत्यादि।

इसके अलावा, अगर कोई अंग्रेज़ी शब्द सामान्य व्यवहार में बहुत प्रचलित हो चुका हो तो उस शब्द का अनुवाद करने से बचें और उसे उसके प्रचलित रूप में ही लिखें (जैसे- रोबोटिक्स, राडार, सॉफ्टवेयर इत्यादि)।

हिंदी भाषा में सहज खण्डों पर अधिक बल दें : अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन के उन खंडों पर ज़्यादा बल फोकस करना चाहिये जिनमें भाषा माध्यम से फर्क न पड़ता हो। अथार्त उस खंड की हिंदी में पर्याप्त अध्ययन सामग्री/पुस्तकें उपलब्ध हों, जो स्थैतिक हों और उसमें पारिभाषिक या तकनीकी शब्दों का प्रयोग अधिक मात्रा में न हो और अगर होते हैं तो ऐसे अधिकांश हिंदी शब्द व्यवहार में मान्य और स्थिर हो चुके हों। ऐसे खंडों में इतिहास, संस्कृति, संविधान, सामाजिक समस्याएँ, सामाजिक न्याय तथा नीतिशास्त्र जैसे खंडों को रखा जा सकता है। हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों को इन खंडों को ज़्यादा गहराई से तैयार कर अन्य प्रतिस्पर्द्धियों से आगे निकलने की हरसंभव कोशिश करनी चाहिए।

स्थैतिक खण्डों के प्रश्नों को हल करने में प्राथमिकता दें : प्रदत्त प्रश्न पत्र में यदि आपको प्रश्न हल करने के लिए विकल्प प्रदत्त किये गए हों तो आपको प्राथमिकता उस प्रश्न को ही देनी चाहिए तो स्थैतिक खंड से सम्बंधित हो। यहाँ यह कतई नहीं कहा जा रहा कि अभ्यर्थी बाकी खंडों की तैयारी छोड़ दे। बाकी खंडों को भी हिंदी में उपलब्ध सामग्री के स्तर पर तैयार किया ही जाना चाहिये।

समय प्रबंधन की रणनीति है अनिवार्य : अभ्यर्थी को प्रारंभिक परीक्षा संपन्न होने के पश्चात मुख्य परीक्षा की तैयारी हेतु अमूमन सिर्फ तीन से साढ़े तीन महीने का समय ही बचता है। अल्प समय में मुख्य परीक्षा के समय प्रबंधन की रणनीति तय करना एक बड़ी चुनौती है। जाहिर है जब समय की कमी हो तो रणनीति की महत्ता बढ़ जाती है। ऐसे में शुरुआत से ही जो छात्र उपलब्ध समयानुरूप मुख्य परीक्षा हेतु विशेष रणनीति अपनाकर अध्ययन करेंगे, उन्हें परीक्षा में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा  पैटर्न  

प्रारंभिक परीक्षा की तरह ही सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की रणनीति बनाने से पूर्व इसके स्वरूप एवं ‘पाठ्यक्रम’ की संरचना का अध्ययन करें एवं उसके समस्त भाग एवं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सुविधा एवं रुचि के अनुसार वरीयता क्रम निर्धारित करें।

ध्यातव्य है कि सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में विषयों का बँटवारा अनिवार्य एवं वैकल्पिक विषय के रूप में किया गया है।अनिवार्य विषयों में निबंध, सामान्य अध्ययन के चार प्रश्नपत्र, अंग्रेजी भाषा (क्वालिफाइंग) एवं हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा (क्वालिफाइंग) तथा वैकल्पिक विषय के अंतर्गत अभ्यर्थी द्वारा चयनित कोई एक वैकल्पिक विषय शामिल है।

2012 तक यह परीक्षा कुल 2000 अंकों की होती थी परन्तु 2013 से यह संरचना व्यापक रूप से बदल गई है। अब मुख्य परीक्षा कुल 1750 अंकों की है जिसमें 1000 अंक सामान्य अध्ययन के लिये (250-250 अंकों के 4 प्रश्नपत्र), 500 अंक एक वैकल्पिक विषय के लिये (250-250 अंकों के 2 प्रश्नपत्र) तथा 250 अंक निबंध के लिये निर्धारित हैं।

नवीन संशोधन के पश्चात् सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के विभिन्न प्रश्नपत्र तथा उनके भारांक इस प्रकार हैं-

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा पैटर्न 2018      

क्रम संख्या प्रश्न पत्र प्रश्न पत्र का नाम   अंक   प्रकृति

परीक्षा समयावधि

1 प्रश्न पत्र A अनिवार्य हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा 300 क्वालीफाइंग प्रकृति  3 घंटे
2 प्रश्न पत्र B अंग्रेजी भाषा 300 3 घंटे
3 प्रश्न पत्र -1 निबंध 250  

 

 

अंतिम मेधा सूचि रैंकिंग प्रकृति 

3 घंटे
­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­4 प्रश्न पत्र -2 सामान्य अध्ययन-1

(भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज) 

250 3 घंटे
5 प्रश्न पत्र -3 सामान्य अध्ययन-2

(शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

250 3 घंटे
6 प्रश्न पत्र -4 सामान्य अध्ययन-3

(प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन)

250 3 घंटे
7 प्रश्न पत्र -5 सामान्य अध्ययन-4

(नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति)

250 3 घंटे
8 प्रश्न पत्र -6 वैकल्पिक विषय-1 250 3 घंटे
9 प्रश्न पत्र -7 वैकल्पिक विषय-2 250 3 घंटे
  सम्पूर्ण 1750
नोट: मुख्य परीक्षा के मेरिट का निर्धारण सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्न-पत्र (1000 अंक), वैकल्पिक विषय के दोनों प्रश्न-पत्र (500 अंक) एवं निबंध (250 अंक) के पत्र में प्राप्त अंको के आधार किया जाता है। अतः इसमें अनिवार्य विषय के प्रश्न-पत्र के (600 अंक) अंक नहीं जोड़े जाते।

‘क्वालिफाइंग’ प्रकृति के दोनों प्रश्नपत्र अभी भी वैसे ही हैं जैसे पहले थे। भारतीय भाषा और अंग्रेजी में न्यूनतम अर्हता अंक 25% (75) निर्धारित किये गए हैं। इन प्रश्नपत्रों के अंक अंतिम मेधा सूचि के निर्धारण में नहीं जोड़े जाते हैं।

उत्तर लिखने की भाषा:  विदित हो कि मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र दृभाषा (अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं) में प्रकाशित होते हैं, पर अभ्यर्थी संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से किसी में भी परीक्षा में अपना उत्तर लिख सकते हैं। केवल साहित्य के विषयों में यह अनिवार्य है कि उम्मीदवार उसी भाषा की लिपि में उत्तर लिखे, चाहे उसका माध्यम वह भाषा न हो। उदाहरण के लिये, अंग्रेज़ी माध्यम का उम्मीदवार अगर वैकल्पिक विषय के रूप में हिंदी साहित्य का चयन करता है तो उसके उत्तर वह देवनागरी लिपि में लिखेगा। शेष मामलों में, इसकी अनुमति नहीं है कि उम्मीदवार अलग-अलग प्रश्नपत्रों के उत्तर अलग-अलग भाषाओं में दे।

मुख्य परीक्षा है अहम : ध्यातव्य है कि सिविल सेवा परीक्षा के लिये निर्धारित 2025 अंकों (1750 मुख्य परीक्षा एवं 275 साक्षात्कार) में मुख्य परीक्षा का अंश बहुत अधिक (लगभग 86% से ज़्यादा) है। ऐसे में जो परीक्षार्थी मुख्य परीक्षा में अधिक से अधिक अंक प्राप्त करेगा, उसके लिये न केवल साक्षात्कार बल्कि अंतिम रूप से चयनित होने की राह बहुत आसान हो जाएगी। अत: परीक्षा के इस चरण के लिये एक कारगर रणनीति बनाने की आवश्यकता है।

 

परीक्षा प्रश्नों की प्रकृति 

मुख्य परीक्षा के सात प्रश्नपत्रों में 4 सामान्य अध्ययन के, 2 वैकल्पिक विषय के और एक निबंध का प्रश्नपत्र शामिल है। सामान्य अध्ययन के चार प्रश्नपत्रों में विभिन्न विषय शामिल हैं। यदि मोटे तौर पर सामान्य अध्ययन के संपूर्ण पाठ्यक्रम को देखा जाए तो इसके अंतर्गत मुख्य रूप से भारत और विश्व का इतिहास, भारत और विश्व का भूगोल, संविधान व राजव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक न्याय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था तथा एथिक्स आदि खंड शामिल हैं।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 

सामान्य अध्ययन, प्रश्नपत्र-4 को छोड़कर शेष सभी प्रश्नपत्रों में 20 या 25 अनिवार्य प्रश्न होते हैं जिन्हें नियत समय (3 घंटे) व निश्चित शब्द-सीमा (सामान्यतः 100 से 200 शब्दों) के अंतर्गत लिखना होता है। प्रश्नों की संख्या एवं उत्तर की शब्द सीमा में आयोग द्वारा समय-समय पर परिवर्तन किया जाता रहा है।

सामान्य अध्ययन के प्रथम तीन प्रश्नपत्रों में विगत दो वर्षों से प्रत्येक प्रश्नपत्र में कुल 20 प्रश्न पूछे जा रहे हैं जिनका उत्तर 200 शब्दों में लिखना होता है। प्रत्येक प्रश्न के लिये 12.5 अंक निर्धारित किया गया है।

सामान्य अध्ययन का चतुर्थ प्रश्नपत्र (नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति) मुख्यत: दो भागों (थ्योरी एवं केस स्टडी) में विभाजित है, जिनमें विगत दो वर्षों से थ्योरी खंड से लगभग 8 प्रश्न (लगभग 130-150 अंक) और केस स्टडी खंड से लगभग 6 से 7 प्रश्न (लगभग 100-120 अंक) पूछे जा रहे हैं। ये प्रश्न दो-तीन उपभागों में विभजित होते हैं। उत्तर की शब्द सीमा (सामान्यत: 150-300 शब्द) में आयोग द्वारा समय-समय पर परिवर्तन किया जाता रहा है।

निबंध प्रश्न पत्र 

निबंध का प्रश्नपत्र मुख्यत: दो भागों (मूर्त एवं अमूर्त रूप) में विभाजित रहता है। प्रत्येक भाग में दिये गए 4 विकल्पों में से एक-एक विकल्प का चयन करते हुए कुल दो निबंध (प्रत्येक 125 अंक) लिखने होते हैं। प्रत्येक निबंध के लिये निर्धारित शब्द सीमा लगभग 1000-1200 होती है।

वैकल्पिक प्रश्न पत्र

वैकल्पिक विषय (अभ्यर्थी द्वारा चयनित) के दोनों प्रश्नपत्र मुख्यतः दो-दो खंडों (खंड-क एवं खंड-ख) में विभाजित रहते हैं। प्रत्येक खंड से 4-4 प्रश्न (कुल 8 प्रश्न) पूछे जाते हैं। उम्मीदवारों को कुल 5 प्रश्नों के उत्तर लिखने होते हैं, जिनमें खंड-क एवं खंड-ख से पहला प्रश्न (क्रमश: प्रश्न संख्या 1 और 5 ) अनिवार्य होता है और शेष में से 3 प्रश्नों का उत्तर लिखना होता है, जिनमें प्रत्येक खंड से कम-से-कम एक प्रश्न अवश्य होना चाहिये। प्रश्न संख्या 1 और 5 (अनिवार्य प्रश्न) 5 उपखंडों (क ख ग घ और ङ ) में विभाजित रहता है, जिनमें प्रत्येक प्रश्न के लिये 10 अंक (शब्द सीमा 150) निर्धारित किया गया है तथा शेष प्रश्न 3 उपखंडों (क ख और ग) में विभाजित रहते हैं , जिनमें प्रत्येक प्रश्न के लिये 15-20 अंक (शब्द सीमा 100-300) निर्धारित किया गया है। प्रश्नों की संख्या एवं उत्तर की शब्द सीमा में आयोग द्वारा परिवर्तन किया जा सकता है।

क्वालिफाइंग प्रश्न पत्र 

क्वालिफाइंग अंग्रेज़ी भाषा प्रश्नपत्र के सभी प्रश्न अनिवार्य होते हैं, जिनका उत्तर उम्मीदवार को केवल अंग्रेज़ी भाषा में ही लिखना होता है। इस प्रश्नपत्र में मुख्यतः 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं जो एक से अधिक उपखंडों में विभाजित रहते हैं। उत्तर की शब्द सीमा एवं  उसके लिये निर्धारित अंक प्रत्येक प्रश्न के सामने अंकित रहता है ।

क्वालिफाइंग हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किसी भाषा के प्रश्नपत्र के सभी प्रश्न अनिवार्य होते हैं, जिनका उत्तर उम्मीदवार को केवल उसी भाषा में ही लिखना होता है जिस भाषा में प्रश्नपत्र का चयन किया गया है (यदि किसी प्रश्न विशेष में अन्यथा निर्दिष्ट न हो)। इस प्रश्नपत्र में मुख्यतः 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं जो एक से अधिक उपखंडों में विभाजित रहते हैं। उत्तर की शब्द सीमा एवं  उसके लिये निर्धारित अंक प्रत्येक प्रश्न के सामने अंकित रहता है ।

दोनों क्वालिफाइंग प्रश्नपत्रों में न्यूनतम अर्हता अंक 25-25% (75) निर्धारित किये गए हैं। इन प्रश्नपत्रों के अंक योग्यता निर्धारण में नहीं जोड़े जाते हैं।

क्या रणनीति अपनाई जाए ? 

विगत दो वर्षों में संघ लोक सेवा आयोग ने सीधे तौर पर परंपरागत प्रश्नों की बजाय समीक्षात्मक, मूल्यांकनात्मक, तुलनात्मक व आलोचनात्मक प्रकृति के प्रश्न ज़्यादा पूछे हैं। प्रश्नों की शब्द-सीमा तय होने के बावजूद उत्तर की विषय-वस्तु को शब्द-सीमा पर वरीयता दी गई है। किंतु, प्रश्नों की इतनी अधिकता है कि सभी प्रश्नों के उत्तर निर्धारित शब्द-सीमा में लिखने पर समय-प्रबंधन खुद एक समस्या बन जाता है। अतः निम्न सुझावों को स्मरण रखें और अपनी तैयारी इसी अनुरूप करें-

सामान्य अध्ययन की परीक्षा में उपयोगिता

पाठ्यक्रम के विस्तार व अंकों की दृष्टि से मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की भूमिका सर्वाधिक यानी आधे से ज़्यादा है। अगर सिविल सेवा परीक्षा के तीनों चरणों (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार) की दृष्टि से भी देखें तो भी पूरी परीक्षा सिर्फ सामान्य अध्ययन का ही खेल मालूम पड़ती है। इसलिये, किसी को भी पहली नज़र में ऐसा लग सकता है कि सामान्य अध्ययन ही सिविल सेवा परीक्षा की कुंजी है। अभ्यर्थियों को यह बात भली-भाँति समझ लेना चाहिये कि इसके पाठ्यक्रम का विस्तार अनंत है और अगर वे जीवन भर पढ़ते रहें तो भी उस निश्चिंतता को हासिल नहीं कर सकते हैं जिसमें उन्हें पाठ्यक्रम पूरा तैयार हो जाने का अहसास हो। इसलिये पाठ्यक्रम के विभिन्न हिस्सों पर अलग-अलग मात्रा में बल देना ही सफलता की एकमात्र रणनीति है।

रोजाना अखबार पढ़ें

अगर आप सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो रोज अखबार पढ़ना न भूलें। UPSC के पेपर में जनरल अवेयरनेस से जुड़े काफी सवाल आते हैं, रोज अखबार पढ़ने से आप देश और दुनिया में घट रही घटनाओं को लेकर अवेयर रहेंगे। इसीलिए अखबार पढ़ने की आदत डाल लें।

NCERT पुस्तकों का अध्ययन अवश्य करें

मेन्स की तैयारी के लिए सही किताबों का चयन करना बेहद जरूरी है। आपके पास जितना अच्छा स्टडी मेटिरियल होगा आपकी तैयारी उतनी ही बेहतर होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करने के लिए उम्मीदवारों को NCERT की किताबों को जरूर पढ़ना चाहिए। खास तौर पर सोशल साइंस की किताब तो जरूर पढ़ें। NCERT की किताबें यूपीएससी की तैयारी के लिए बेहद हेल्पफुल हैं।

रटें नहीं समझ विकसित करें 

प्रारम्भिक परीक्षा के विपरीत मुख्य परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर को उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्दों में  लिखना होता है अत: इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये विषय की गहरी समझ एवं विश्लेषणात्मक क्षमता का होना अनिवार्य है। प्रश्नों की प्रकृति अब रटंत पद्धति से हटकर अवधारणात्मक सह-विश्लेषणात्मक प्रकार की हो गई है।

निर्धारित समय में सटीक उत्तर लेखन सीखें 

मुख्य परीक्षा के इस बदले हुए परिवेश में जहाँ समय प्रबंधन एक चुनौती बनकर उभरा है, वहीं इस मुख्य परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये न केवल सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के विस्तृत समझ की आवश्यकता है बल्कि विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों एवं उस पर आधारित छद्म प्रश्नों का निर्धारित समय व निर्धारित शब्दों में उत्तर-लेखन आवश्यक है। इसके लिए छात्रों को पढ़ने के साथ-साथ लिखने पर भी फोकस करना होगा। कई बार उम्मीदवार सिर्फ पढ़ने पर ही फोकस करते हैं। आईएएस की मेन्स परीक्षा सब्जेक्टिव टाइप परीक्षा है। इसलिए अगर आप मेन्स परीक्षा में सफल होना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि आप अपनी राइटिंग स्किल पर काम कर निखार लाना शुरू कर दें।

प्रश्न विभाजन के आधार पर करें तैयारी

मुख्य परीक्षा के प्रश्नों की प्रकृति को मुख्यतः चार आधारों (स्थैतिक, गत्यात्मक, तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न) पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जिनके समन्वय से सरल, जटिल और विश्लेषणात्मक प्रकृति के प्रश्न पूछे जाते हैं- स्थैतिक प्रश्नों में ज़्यादा फैलाव या विस्तार नहीं होता है। ऐसे प्रश्न मूल पाठ्य-पुस्तकों, जैसे- लक्ष्मीकांत, विपिन चंद्रा, माजिद हुसैन आदि से ही सीधे-सीधे पूछ लिये जाते हैं। इसलिये, इन्हें हल करने हेतु मूल पाठ्य-पुस्तकों को पढ़ना आवश्यक है। गत्यात्मक प्रश्नों का स्वरूप बहुआयामी होता है और ये अंतरअनुशासनात्मक प्रकृति के भी होते हैं। इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर मूल पाठ्य-पुस्तक में नहीं मिलते, बल्कि अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं और रोज़मर्रा के समाचारों में उपलब्ध होते हैं। अतः ऐसे प्रश्नों के उत्तर लिखने के लिये स्तरीय समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं तथा अपने परिवेश में होने वाले बदलाव का सूक्ष्म अध्ययन ज़रूरी है। अतः छात्रों को इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

तैयारी प्राथमिकता की रणनीति

यूपीएससी की तैयारी के लिए आपके पास डेली स्टडी प्लान होना चाहिए। परीक्षा की तैयारी के लिए दिन में 9-10 घंटे पढ़ना जरूरी नहीं है। स्टडी के लिए प्लान तैयार करें कि किस टाइम आप क्या विषय पढ़ेंगे। एक ही विषय को लगातार पढ़ने के चक्कर में आप पढ़ी हुई चीजों को भूल भी सकते हैं, इसीलिए तैयारी करने के लिए एक डेली स्टडी प्लान बना लें और उसके हिसाब से पढ़ाई करें। मुख्य परीक्षा की तैयारी के दौरान छात्र सबसे ज़्यादा ध्यान निबंध और वैकल्पिक विषय पर दें। उसके बाद सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र-4 पर; फिर पेपर-1 पर तथा अंतिम प्राथमिकता पर पेपर-2 और 3 को रखें।

नोट्स बनाएं और उत्तर लेखन की बेहतर रीति से हों अवगत

मुख्य परीक्षा की बेहतर तैयारी हेतु छात्रों को स्वयं के नोट्स तैयार करते रहना चाहिये और साथ ही साथ उनका रिवीज़न भी करते रहना चाहिये। मानक उत्तर क्या हो इस हेतु ‘करेंट अफेयर्स’ मैगज़ीन के समसामयिक मुद्दों पर संभावित प्रश्नोत्तरों तथा एथिक्स खंड से जुड़े प्रश्नोत्तरों को देखा जा सकता है।

पिछले सालों के पेपर सॉल्व करें

उम्मीदवारों को पिछले सालों के पेपर्स को जरूर सॉल्व करना चाहिए। पिछले 3-4 सालों के UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पेपर्स को सॉल्व करें, इससे आपको ये पता चल जाएगा कि परीक्षा में किस तरह के सवाल आते हैं और उनका कठिनाई स्तर क्या होता है। आप यह भी सीख पाएंगे की निर्धारित समय में आप कैसे अपने ज्ञान को प्रस्तुत कर सकते हैं

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7 COMMENTS

    • हम नियमित मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए प्रश्न पत्र वार लेख आप तक पंहुचा रहे हैं. आप उससे लाभान्वित होंगे.

  1. Very good approach for understanding civil services study material in hindi medium aspirants….Dr.M.V.Maheep,

  2. Mujhe online tyari karni hai but i am compused ias me percent age kitna huna chahiye 10th & 12th final year me online tyari ke liye kya process hai

    • IAS परीक्षा के लिए आपको स्नातक (ग्रेजुएशन) पास होना चाहिए. आपके हाई स्कूल, इंटरमीडियत में आपके कितने अंक आए थे, यह परीक्षा के लिए नहीं देखा जाता. आप
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